प्रीतम टंडन
पब्लिक स्वर,अभनपुर/नवापारा/रायपुर।एक ओर सरकार रायगढ़, बस्तर सहित राज्य के कई इलाकों में जंगल कटाई को लेकर जबरदस्त विरोध झेल रही है, वहीं दूसरी ओर अभनपुर वन परिक्षेत्र में वन विभाग के संरक्षण में अर्जुन वृक्षों की खुली लूट जारी है। हैरानी की बात यह है कि वन विभाग रायपुर ने बिना किसी उद्योग की स्थापना, बिना किसी MOU या वैधानिक अनुमति के अर्जुन वृक्षों को सीधे लकड़ी माफियाओं के हवाले कर दिया गया है।
वन विभाग के अधिकारियों ने रायपुर के अर्जुन वृक्षों का किया सौदा
स्थिति यह है कि दिन-रात अर्जुन लकड़ी का अवैध परिवहन कर माफिया बेखौफ तरीके से आरा मिलों तक लकड़ी पहुंचा रहे हैं। ज़मीनी तस्वीरें खुद गवाही दे रही हैं कि किस तरह यह पूरा सिंडिकेट संगठित रूप से काम कर रहा है और वन विभाग आंखें मूंदे बैठा है।खबर है कि पब्लिक स्वर के लगातार खुलासे के बाद हर सीजन की अपेक्षा इस सीज़न में लकड़ी माफियाओं से वन विभाग के अधिकारियों ने दुगनी वसूली कर छूट दे दी है।बताते हैं कि इसमें रेंजर महोबिया,डिप्टी रेंजर खेस,ठाकुर और देवांगन ने विभाग से तगड़ी सेटिंग करवाई है।
अभनपुर के आमनेर क्षेत्र की 3 आरा मिलों, खोरपा की 1 आरा मिल, अभनपुर की 3 आरा मिलों और नवापारा क्षेत्र की आरा मिलों में धड़ल्ले से अर्जुन लकड़ी की अवैध कटाई और चिराई चल रही है। न तो वन परिवहन पास की सख्ती दिख रही है, न ही किसी प्रकार की नियमित जांच।आलम यह है कि मासिक रिपोर्ट तक नहीं बनवाई जा रही है।
अभनपुर,नवापारा के कई क्षेत्रों में अर्जुन लकड़ियों का जबरदस्त भंडारण
सबसे गंभीर बात यह है कि लकड़ी माफियाओं ने कई स्थानों पर अर्जुन लकड़ी का भारी भंडारण पहले से कर रखा है, ताकि पूरे सीजन अवैध कारोबार बिना रुके चलता रहे।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अभनपुर वन परिक्षेत्र लकड़ी माफियाओं के लिए ‘फ्री ज़ोन’ बन चुका है?
पब्लिक स्वर अगली खबर में अर्जुन लकड़ी के अवैध भंडारण, परिवहन नेटवर्क और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका का खुलासा करेगा।

Public Swar Desk









