पब्लिक स्वर,रायपुर। रायपुर के उरला थाना क्षेत्र अंतर्गत बेंद्री औद्योगिक क्षेत्र स्थित 3डी इनोवेशन फैक्ट्री में मंगलवार शाम हुए भीषण विस्फोट में तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। धमाका इतना तेज था कि मृतकों के शरीर के अंग करीब 200 मीटर दूर तक जा गिरे। हादसे के बाद पूरे औद्योगिक क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
मृतकों की पहचान जांजगीर-चांपा निवासी अरुण पांडेय (17), मध्य प्रदेश के डिंडौरी निवासी लाल सिंह तथा कमल सिंह (25) के रूप में हुई है। कमल सिंह ने गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि हादसे के समय अरुण ऑक्सीजन सिलेंडर बदल रहा था, तभी अचानक जोरदार विस्फोट हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना भीषण था कि पूरी फैक्ट्री की बिजली गुल हो गई। लगभग 10 मिनट बाद बिजली आने पर मजदूरों ने देखा कि उनके साथ काम करने वाले साथियों के शव और शरीर के अंग चारों ओर बिखरे पड़े थे। टेपिंग यूनिट में कार्यरत रामकुमार देवांगन ने बताया कि उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला और देखते ही देखते सब कुछ खत्म हो गया।
हादसे के बाद पुलिस, एफएसएल और श्रम विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। फैक्ट्री के भीतर विस्फोट वाली यूनिट में चारों ओर मलबा और शवों के अवशेष बिखरे मिले। अधिकारियों ने घटनास्थल को सील कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
मजदूरों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी प्रशिक्षण के सीधे भट्ठी (फर्नेस) सेक्शन में काम पर लगाया जाता था। पर्याप्त सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए जाते थे। कई मजदूरों का आरोप है कि सेफ्टी शूज तक अपने खर्च पर खरीदने के लिए कहा जाता था, जबकि जोखिम भरे कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता था।
मध्य प्रदेश के उमरिया निवासी मजदूर सूर्यभान सिंह ने बताया कि तीन महीने पहले नौकरी पर आने के बाद उन्हें किसी प्रकार की ट्रेनिंग नहीं दी गई और सीधे फर्नेस में काम पर लगा दिया गया। वहीं हेल्पर अंकित सिंह ने भी बिना प्रशिक्षण के काम कराए जाने और सुरक्षा उपकरणों की कमी का आरोप लगाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय टेपिंग यूनिट के पास कुछ मजदूर भोजन बना रहे थे। गैस सिलेंडर खत्म होने के कारण वे भट्ठी से निकलने वाली गर्मी का उपयोग कर खाना तैयार कर रहे थे। इसी दौरान जोरदार धमाका हुआ।
हादसे में जान गंवाने वाले अरुण पांडेय की उम्र आधार कार्ड के अनुसार 17 वर्ष थी। परिजनों का कहना है कि परिवार लंबे समय से उरला क्षेत्र में मजदूरी करता है और रिश्तेदार पहले से इसी फैक्ट्री में कार्यरत थे। इसी वजह से अरुण भी यहां नौकरी करने आया था। परिवार ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
जानकारी के अनुसार, बेंद्री औद्योगिक क्षेत्र स्थित 3डी इनोवेशन फैक्ट्री वर्ष 2005 से संचालित हो रही है। यह एक पार्टनरशिप फर्म है, जिसमें नारायण वेदुला और दिनेश वेदुला प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते हैं। कंपनी पिग आयरन रिफाइनिंग, फेरो सिलिकॉन लंप निर्माण एवं सप्लाई के साथ-साथ पिग आयरन और सोलर पैनल से जुड़े कारोबार में भी सक्रिय है।
इस बीच अधिवक्ता विपिन अग्रवाल ने बताया कि 14 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों से फैक्ट्री, खदान और अन्य खतरनाक उद्योगों में काम कराना कानूनन प्रतिबंधित है। यदि जांच में नाबालिग से खतरनाक कार्य कराए जाने की पुष्टि होती है तो फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ संज्ञेय अपराध के तहत एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जा सकती है। दोष सिद्ध होने पर दो वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। फिलहाल पुलिस, श्रम विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां ब्लास्ट के वास्तविक कारण, सुरक्षा मानकों के पालन, फैक्ट्री प्रबंधन की जिम्मेदारी तथा नाबालिग से काम कराए जाने सहित सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं।

User 1














