पब्लिक स्वर,अभनपुर/रायपुर। किसानों की सिंचाई जरूरतों को पूरा करने और क्षेत्र में कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए ठेलकाबांधा-खोला बांध को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि बांध क्षेत्र में कथित खनिज गतिविधियों और अवैध उत्खनन के चलते इसकी मूल संरचना प्रभावित हो रही है। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही गतिविधियों ने प्रशासनिक निगरानी और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि जिस जलस्रोत और बांध का निर्माण क्षेत्र के हजारों किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, वही क्षेत्र अब कथित तौर पर खनिज कारोबार से जुड़े लोगों की गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। आरोप है कि बांध के आसपास खनिज उत्खनन और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों के कारण बांध के प्राकृतिक स्वरूप और उसके आसपास के भू-भाग में बदलाव देखने को मिल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बांध क्षेत्र में बिना अनुमति या नियमों के विपरीत किसी भी तरह का उत्खनन हो रहा है, तो इसका सीधा असर जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ सकता है। वहीं, भारी वाहनों की आवाजाही और लगातार खनिज गतिविधियों से बांध की संरचना को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।
करोड़ों की लागत से बनी संरचना, निगरानी पर सवाल
ठेलकाबांधा-खोला बांध का उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना रहा है। ऐसे में बांध की सुरक्षा और जलधारण क्षमता से किसी भी तरह का समझौता किसानों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
सवाल यह भी है कि यदि बांध क्षेत्र में लंबे समय से खनिज उत्खनन या अन्य गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो संबंधित विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी? क्या इन गतिविधियों के लिए किसी प्रकार की अनुमति या पर्यावरणीय स्वीकृति ली गई है? यदि अनुमति नहीं है, तो अब तक जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पुख्ता दस्तावेजों और तथ्यों के साथ जुड़े रहिए पब्लिक स्वर के साथ।

User 1






.jpeg)






