EPISODE 7:छत्तीसगढ़ के पुरातत्व संरक्षण में घोटालेबाज अधिकारियों और ठेकेदार को बचाने ‘नोटिस’ का काला खेल, अब CBI जांच की मांग तेज़

विभाग में पदस्थ घूंस जैसे अधिकारी पुरातत्व विभाग को कर रहे खोखला



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कैसे ठेकेदार के रिश्तेदार को मिली पुरातत्व विभाग में PLACEMENT

*भोपाल में पदस्थ अरुण राज टी जैसे अधिकारियों की खुली पोल,क्यों हुई थी FIR

पब्लिक स्वर,रायपुर/भोपाल। छत्तीसगढ़ के सिरपुर, देवबलौदा, रतनपुर और कोर्टगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर चल रहे संरक्षण कार्यों में अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई वर्षों से एक ही ठेकेदार को बार–बार एक जैसे टेंडर की स्वीकृति, मेंटेनेंस के नाम पर फर्जी खर्च और गुणवत्ता रहित निर्माण कार्यों के जरिए करोड़ों रुपये की सरकारी राशि की अनदेखी की गई।

औपचारिक नोटिस से मामले को दबाने की साजिश

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपों के बावजूद विभाग की कार्रवाई सिर्फ “नोटिस भेजने” तक सीमित बताई जा रही है, जिसे स्थानीय लोग दिखावटी कदम बता रहे हैं।SA कालीमुथू ने अनियमितता में संलिप्त ठेकेदार मां शारदा कंस्ट्रक्शन और इंजीनियर CA राहुल तिवारी पर कार्यवाही ना कर एक नोटिस देकर पूरे मामले ने खानापूर्ति कर मामले को शांत करने की साजिश रची है।गौरतलब है कि सिर्फ सिरपुर ही नहीं देवबलौदा,रतनपुर फोर्ट और सूरतगढ़ किले में भी अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।

पब्लिक स्वर ने वीडियो में साफ दिखाया था कि सिरपुर के पद्मपानी क्षेत्र, SRP–13,16,4 पैलेस कॉम्प्लेक्स,देव बलौदा,रतनपुर,सहित  अन्य स्थलों पर किए जा रहे कार्यों में  गुणवत्ता मानकों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।चुना सुरखी का उपयोग तक नहीं किया जा रहा है।कई निम्नस्तरीय कार्य इंजीनियर CA राहुल तिवारी के संरक्षण में हुए।



फिर भी

न तो गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई गई,

न वर्क ऑर्डर प्रक्रिया की समीक्षा,

न अभियंताओं की जवाबदेही तय की गई।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह नोटिस “फाइल बंद करने का तरीका” है, असल कार्रवाई नहीं।

साल दर साल एक जैसे काम, एक ही ठेकेदार ,सवालों के घेरे में वर्क ऑर्डर सिस्टम

सूत्रों का दावा है कि रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर सर्किल में वार्षिक मेंटेनेंस के नाम पर कई सालों से एक ही तरह के कार्यों को बार–बार स्वीकृत कराया गया।

दस्तावेज़ों में यह भी दर्ज है कि:

1.एक ही ठेकेदार को 3 वर्ष से लगातार वर्क ऑर्डर,

2.एक ही प्रकृति के कार्यों की बार-बार मंज़ूरी,

3.कंप्लीशन रिपोर्ट में कथित हेराफेरी,

और कई जगह बिना वास्तविक काम के CHECK MEASUREMENT दर्ज।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह पूरा सिस्टम “ठेकेदारों के फायदे” के हिसाब से चलाया गया।

विभाग में पदस्थ घूंस जैसे अधिकारी पुरातत्व विभाग को कर रहे खोखला

मामले में भोपाल में पदस्थ अरुण राज टी पर ही सबसे ज़्यादा उंगलियां उठ रही है क्योंकि वे लगातार अपने झूठ से भी पकड़े गए जहां पब्लिक स्वर से उन्होंने कहा कि SA कालीमुथू से रिपोर्ट मांगी है जबकि SA ने कहा ये झूठ है।शिकायतकर्ताओं के अनुसार पूर्व में उनके खिलाफ

1.कर्मचारी से जबरन हस्ताक्षर,

2.धमकाना व मारपीट,

3.अरुण राज टी ने अपने ही कर्मचारी को जबरन एक दस्तावेज में साइन करवाने उससे मारपीट की जिसके बाद थाने में मामला दर्ज हुआ यही नहीं अरुण राज टी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण रायपुर मंडल के  Superintending ARCHAELOGIST रहते हुए रविन्द्र शर्मा और नवीन ठाकुर नामक फर्जी ईमेल id के माध्यम से अपने ही कर्मचारी की शिकायत निम्न स्तर के शब्दों के साथ उनकी छवि बिगाड़ने नेताओं को मेल करते थे। लेकिन जब पुलिस और क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की तो अरुण राज टी की पोल खुल गई।और IT एक्ट के तहत उनको गिरफ्तार किया गया।

अब सोचिए जिस अधिकारी पर इतने गंभीर अपराध के मामले दर्ज हो उसे कैसे इतना संरक्षण मिल रहा कि अब वे भोपाल में पदोन्नति लेकर पदस्थ हैं।

आरोप है कि इतने गंभीर मामलों के बाद भी उन्हें विभागीय संरक्षण मिला और उच्च पद पर पदस्थ कर दिया गया।

विभाग में ठेकेदार के परिवार को भी प्लेसमेंट,फर्जी नियुक्तियों और प्रमोशन पर भी उठे सवाल

विभाग में पिछले वर्षों में:

फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र,अपात्र व्यक्तियों की नियुक्तिऔर बाद में पदोन्नतिजैसे मामलों की शिकायतें भी सामने आई हैं। शिकायतकर्ताओं ने इन्हें अदालत में चुनौती देने की तैयारी की है।यही नहीं खुद किसी ठेकेदार के रिश्तेदार किसी झा नामक व्यक्ति की प्लेसमेंट भी विभाग में फोरमैन के पद पर की गई उसकी भी अब पदोन्नति हो गई और वो राज्य के बाहर है।

CBI से 2010–2025 तक की पूरी जांच की मांग

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि CBI को 2010 से 2025 के बीच जारी सभी स्मारक संरक्षण कार्यों के

1.वर्क ऑर्डर,

2.बजट आवंटन,

3.कार्यों की प्रकृति

4.बिल 

5.कार्यों की प्रकृति

जांचने दिए जाएं, तो “अरबों के घोटाले का पर्दाफाश होगा  है।”साथ  की साथ अगर अधिकारियों की संपत्ति की जांच करने पर पुरातत्व विभाग में हड़कंप मचने का अंदेशा है।

अगली रिपोर्ट में अन्य स्मारकों की वास्तविक स्थिति

पब्लिक स्वर की टीम ने दावा किया है कि उनके पास कई अन्य स्मारकों के वीडियो और दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें अगली रिपोर्ट में सार्वजनिक किया जाएगा।






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