रोहित सोनी
पब्लिक स्वर, रायपुर।राजधानी रायपुर में “मोर रायपुर, स्वच्छ रायपुर” जैसे थोथे नारे के बदौलत प्रशासन अपनी पीठ थपा रहा है वहीं दूसरी ओर प्रशासन की कार्यशैली से त्रस्त आम लोग ही उसकी पोल खोलने का बीड़ा उठा रहे हैं।
यह तस्वीर पब्लिक स्वर को स्थानीय निवासी ने भेजी और लिखा "आखिर कहां है महापौर और नगर निगम के अधिकारी।क्या केवल AC कमरे में बैठ कर कागजों में साफ सफाई कर करोड़ों रुपए डकार रहे?"
शहर के बीचों-बीच स्थित दूधाधारी मठ के सामने महाराजबंद तालाब की हालत बद से बदतर होती जा रही है। तालाब में कचरे का अंबार, बदबूदार गंदगी और मच्छरों का प्रकोप स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
तालाब के आसपास गंदगी के ढेर लगे हैं और सड़े-गले कचरे से दुर्गंध फैल रही है। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि कई बार नगर निगम को शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस सफाई अभियान शुरू नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप तालाब का पानी दूषित हो चुका है और डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
नागरिकों का फूटा गुस्सा
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्वच्छता सिर्फ कागज़ों तक सीमित है, ज़मीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग है। कभी यह तालाब शहर का आकर्षण और धार्मिक आस्था का प्रतीक था, लेकिन अब लापरवाही और अनदेखी के कारण बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
शहर में स्वच्छता अभियान की धूम मचाने वाले प्रशासन पर अब सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही सफाई और पुनर्जीवन का कार्य नहीं किया गया तो यह तालाब संक्रमण और बीमारियों का केंद्र बन सकता है।

Public Swar Desk











