राजनीति
सोनपुर-रानीतराई में अवैध व अमानक खाद-दवाइयों का काला कारोबार चरम पर, विभाग मौन
पब्लिक स्वर,रानीतराई/सोनपुर: दुर्ग जिले के पाटन क्षेत्र में अमानक और अवैध कृषि खाद एवं कीटनाशक दवाइयों के कथित कारोबार को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि किसानों की फसलों और उनकी मेहनत की कमाई से जुड़े इस कारोबार में नियमों की अनदेखी कर कृषि रसायनों का भंडारण, पैकिंग और बिक्री की जा रही है। वहीं, संबंधित विभाग की निगरानी और कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अमानक सामग्री खपाने के लिए अलग-अलग काउंटर?
सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर अमानक खाद और कृषि रसायनों को बाजार में खपाने के लिए अलग-अलग नामों से बिक्री काउंटर संचालित किए जा रहे हैं। आरोप है कि अलग-अलग काउंटरों के जरिए कारोबार का स्वरूप इस तरह रखा गया है कि कार्रवाई की स्थिति में वास्तविक नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल हो।
बड़े गोदामों में कथित अवैध भंडारण
क्षेत्र में बड़े गोदामों में भारी मात्रा में कृषि रसायनों के भंडारण की भी जानकारी सामने आने का दावा किया जा रहा है। यदि इन उत्पादों का भंडारण और बिक्री बिना आवश्यक लाइसेंस या नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो यह गंभीर नियामकीय उल्लंघन का विषय हो सकता है।
कीटनाशकों की बिक्री और भंडारण के लिए लाइसेंस जरूरी
कीटनाशक संबंधी कानून के तहत कीटनाशकों के निर्माण, बिक्री, स्टॉक, बिक्री के लिए प्रदर्शन या वितरण के लिए लाइसेंस का प्रावधान है। Insecticides Act, 1968 की धारा 13 लाइसेंस की व्यवस्था करती है, जबकि धारा 18 के तहत बिना लाइसेंस या नियमों के विपरीत कीटनाशकों की बिक्री, स्टॉक या वितरण पर रोक है।
पैकिंग और लेबलिंग के नियम भी सख्त
Insecticides Rules, 1971 के तहत कीटनाशकों के पैकेट पर आवश्यक जानकारी, बैच नंबर, एक्सपायरी और सुरक्षा संबंधी चेतावनियां दर्ज होना जरूरी है। नियमों के अनुसार लेबल और संबंधित पर्चे हिंदी, अंग्रेजी तथा उस क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली एक या दो स्थानीय भाषाओं में होने चाहिए। लेबल पर "SAFE", "NON-POISONOUS", "NON-INJURIOUS" या "HARMLESS" जैसे भ्रामक सुरक्षा दावों पर भी रोक है।
रि-पैकिंग की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
मामले का सबसे गंभीर पहलू कथित रि-पैकिंग और पैकेजिंग से जुड़ा है। सूत्रों का दावा है कि कृषि रसायनों की पैकिंग का काम बाहरी लोगों के बजाय परिवार के सदस्यों और भरोसेमंद लोगों के माध्यम से कराया जाता है। यदि किसी उत्पाद की मूल पैकिंग, लेबल या निर्माता से संबंधित जानकारी में अनधिकृत बदलाव पाया जाता है, तो यह भी नियामकीय जांच का विषय बन सकता है। नियमों में निर्माता द्वारा कंटेनर, लेबल या रैपर पर दर्ज जानकारी को बदलने या मिटाने पर प्रतिबंध है।
सवाल यह कि विभाग की नजर कहां है?
इतने गंभीर आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। क्या क्षेत्र में संचालित दुकानों और गोदामों के लाइसेंस की नियमित जांच हो रही है? क्या कृषि रसायनों के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच की गई? क्या कथित रि-पैकिंग और भंडारण की जांच हुई? और यदि शिकायतें पहले से सामने आई हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों का जवाब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
"पब्लिक स्वर" करेगा दस्तावेजों और ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर पड़ताल
किसानों से जुड़े इस मामले में "पब्लिक स्वर" की टीम दस्तावेजों, लाइसेंस रिकॉर्ड, गोदामों और संबंधित पक्षों से मिली जानकारी के आधार पर पड़ताल कर रही है। आगे की रिपोर्ट में उपलब्ध साक्ष्यों और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की परत-दर-परत जानकारी सामने रखी जाएगी।