पब्लिक स्वर,बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं और अव्यवस्थाओं को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र पर सवाल उठाते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने टिप्पणी की कि दस्तावेज को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है।
कोर्ट ने कहा कि शपथ पत्र के कई हिस्सों में एक जैसी बातें बार-बार दोहराई गई हैं। दस्तावेज भले ही व्यवस्थित और आकर्षक दिखाई दे, लेकिन इससे अस्पताल की वास्तविक स्थिति नहीं बदल जाती। चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा कि यदि CIMS में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त होतीं, तो मामला जनहित याचिका के रूप में हाईकोर्ट तक पहुंचने की नौबत ही नहीं आती।
कोर्ट ने कहा- वास्तविक स्थिति बताइए, गुमराह नहीं
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अदालत के समक्ष वास्तविक स्थिति रखी जानी चाहिए। तथ्यों को छिपाने या औपचारिक दस्तावेजों के जरिए अदालत को संतुष्ट करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है।
कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में सामने आई गंभीर खामियां
सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नरों द्वारा मार्च और अप्रैल 2026 में किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार CIMS में कई गंभीर कमियां अब भी मौजूद हैं।
रिपोर्ट में प्रमुख रूप से सामने आया कि अस्पताल भवन में पानी के रिसाव (सीपेज) की गंभीर समस्या बनी हुई है। हाल ही में हुई बारिश के दौरान अस्पताल के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। इसके अलावा अस्पताल का फायर फाइटिंग सिस्टम लंबे समय से बंद पाया गया, जिससे मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हुए।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अस्पताल के फायर फाइटिंग सिस्टम की मरम्मत के लिए 15 जून 2026 को कार्यादेश जारी कर दिया गया है और वर्तमान में मरम्मत का कार्य तेजी से जारी है।

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