पब्लिक स्वर,अभनपुर/रायपुर। वर्ष 2016 से 2022 तक अभनपुर वन परिक्षेत्र में करोड़ों रुपए के घोटाले हुए हैं। इन वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध गतिविधियों की परतें खुलने से पहले ही विभाग के उच्च अधिकारी तथ्यों पर सफेद चादर डालने में जुटे हुए हैं। यही कारण है कि जनसूचना अधिकारी को जवाब न देने की खुली छूट मिल रही है और प्रथम अपीलीय अधिकारी भी निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय सूचना दबाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। ऐसे ही मामला तिल्दा विकासखण्ड के मोहरेंगा वन परिक्षेत्र स्थित पर्यटक क्षेत्र में हुए निर्माण कार्यों से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी के लिए एक आवेदक ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदक को सूचना देने के बजाय जनसूचना अधिकारी ने 1200 पृष्ठों से अधिक का हवाला देते हुए अवलोकन हेतु कार्यालय आने का पत्र भेज दिया, जबकि आवेदन में कहीं भी अवलोकन की मांग नहीं की गई थी।
इसके बाद आवेदक ने जिला वनमंडल अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील दायर की, लेकिन तय समयसीमा निकल जाने के बाद ही अपीलीय अधिकारी की ओर से सुनवाई संबंधी पत्र भेजा गया। जबकि अपील में आवेदक ने स्पष्ट रूप से अपना पता और मोबाइल नंबर उल्लेखित किया था।
यह मामला वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आम नागरिकों को समय पर और सही जानकारी उपलब्ध कराना विभागीय जिम्मेदारी है, लेकिन यहां जनसूचना अधिकारी से लेकर प्रथम अपीलीय अधिकारी तक नियमों का पालन करने में गंभीर चूक सामने आई है।
ज्ञात हो कि आवेदक ने 23 जून 2025 को तीव्र गति डाक से आवेदन भेजा था और 14 अगस्त 2025 को प्रथम अपील दायर की थी। जिसमें सुनवाई दिनांक 01/09/2025 को दिया गया किंतु सुनवाई का पत्र सुनाई की तारीख सुनवाई हो जाने के बाद मिला

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