राजनीति
गंगरेल डैम से हजारों क्यूसेक पानी छोड़ने के बीच मछली पकड़ने का जोखिम, सुरक्षा पर उठे सवाल
पब्लिक स्वर,धमतरी। गंगरेल जलाशय में लगातार बढ़ते जलस्तर और पानी की आवक को देखते हुए जलाशय के तीन गेट खोल दिए गए हैं। बांध से फिलहाल कुल 4,670 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसमें 1,410 क्यूसेक पानी रुद्री बैराज के जरिए नहर में, जबकि 3,360 क्यूसेक पानी सीधे महानदी में छोड़ा जा रहा है। बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के चलते महानदी का जलस्तर बढ़ रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
प्रशासन की चेतावनी के बीच डैम के मुहाने पर लापरवाही
प्रशासन की अपील के बावजूद गंगरेल डैम के संवेदनशील हिस्से में लोगों की लापरवाही सामने आई है। सामने आई तस्वीरों में कुछ लोग तेज बहाव वाले पानी के बीच मछली पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। जिस स्थान के आसपास हजारों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, वहीं लोग जाल डालकर मछली पकड़ने का जोखिम उठा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि डैम के आसपास छोटे बच्चे भी घूमते हुए नजर आ रहे हैं। जलस्तर बढ़ने और गेट खुले होने की स्थिति में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। ऐसे में जरा सी चूक गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
बैरिकेडिंग और सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
गंगरेल डैम के मुहाने की तस्वीरों में पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद यदि लोग आसानी से पानी के मुहाने तक पहुंच रहे हैं, तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। तेज बहाव के बीच किसी व्यक्ति का पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने पर उसे संभलने का मौका मिलना मुश्किल हो सकता है। खासकर बच्चों के पानी के नजदीक पहुंचने की स्थिति में जोखिम और बढ़ जाता है।
निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह
जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद महानदी और आसपास के जलस्रोतों के जलस्तर पर प्रशासन नजर बनाए हुए है। नदी, नालों और जलाशयों के आसपास जाने से लोगों को बचने की सलाह दी गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। मैदानी अमले को भी लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन लोगों को जलाशयों और नदी के आसपास नहीं जाने की चेतावनी दे रहा है, तो गंगरेल डैम के मुहाने जैसे संवेदनशील स्थान पर लोग किस तरह पहुंच रहे हैं। बारिश और जलाशय में बढ़ती पानी की आवक को देखते हुए संवेदनशील हिस्सों में बैरिकेडिंग, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है, ताकि किसी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके।