अभनपुर post authorUser 1 08 November 2025

भारतमाला में ‘कोलर कनेक्शन’: करोड़ों का मुआवजा घोटाला, मगर तहसीलदार कृष्ण कुमार, SDM और पटवारी अब भी आज़ाद!



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पब्लिक स्वर,अभनपुर,रायपुर/ भारतमाला परियोजना में भ्रष्टाचार के कई परतें खुल चुकी हैं, कई अधिकारी सलाखों के पीछे हैं, जांच एजेंसियों ने दर्जनों फाइलें खोलीं, पर अभनपुर तहसील के ग्राम कोलर में रचा गया सबसे बड़ा घोटाला अब भी कार्रवाई के इंतज़ार में है।

दरअसल कोलर में सबसे बड़ा मुआवजा घोटाला की नींव रखने वाले तहसीलदार कृष्ण कुमार साहू, पटवारी संजीव खुदशाह और तत्कालीन एसडीएम जगन्नाथ वर्मा पर अब तक EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) ने कोई कार्यवाही नहीं की, जबकि दस्तावेज़ और ज़मीनी साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि कोलर में मुआवजा वितरण के नाम पर करोड़ों का खेला रचा गया है।


खसरा 128: 54 टुकड़ों में बंटा और करोड़ों की साजिश की नींव रखी गई

ग्राम कोलर का खसरा क्रमांक 128 इस पूरे खेल की जड़ है।इसे 54 हिस्सों में बाँटकर भारतमाला परियोजना के मुआवजा वितरण की ऐसी रूपरेखा बनाई गई जिससे सरकार को 50 करोड़ रुपये से

अधिक का नुकसान होना था।

हालांकि “पब्लिक स्वर” के खुलासे के बाद नवीन एसडीएम रवि सिंह ने मामले को संज्ञान में लेते हुए मुआवजा को “एकड़ के आधार पर” देने का निर्णय लिया, जिससे एक बड़ा आर्थिक नुकसान रुक गया।

लेकिन सवाल यही है कि इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिए जाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने वाले SDM,तहसीलदार और पटवारी पर अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई।


कोलर का ही दूसरा मामला,खसरा 305: अधिसूचना के बाद बटवारा और 11 करोड़ 84 लाख का मुआवजा

दूसरा मामला खसरा क्रमांक 305 (रकबा 1.214 हेक्टेयर) का है। इस भूमि को 24 टुकड़ों में बांटकर 11.84 करोड़ रुपये का मुआवजा निकाला गया। इस पूरे बटवारे में वही नाम सामने आता है पटवारी संजीव खुदशाह।

दस्तावेज़ बताते हैं कि यह बटवारा अधिसूचना जारी होने के बाद किया गया था, यानी यह पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से प्रतिबंधित थी।

भूमि के स्वामियों में यशवंत पिता तुलसीराम और कुछ नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक, इन्हीं नामों का इस्तेमाल कर मुआवजे की राशि का बंटवारा “औपचारिक कागजों” में दिखाया गया, जबकि असल रकम कुछ हाथों में सिमट गई।


तीन साल तक एक ही पटवारी – और बटवारे की फैक्ट्री चलती रही

कोलर गांव में पटवारी संजीव खुदशाह लगातार तीन वर्षों तक पदस्थ रहे। भारतमाला परियोजना में जब बटांकन (प्लॉट विभाजन) पर रोक लगाई गई थी, उसी दौरान उन्होंने अवैध बटवारे कराए — जिनसे बाद में करोड़ों के मुआवजे का रास्ता खुला।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि “भूमि रिकॉर्ड में बदलाव बिना ग्रामसभा की जानकारी के किए गए और कई बंटवारे सिर्फ फाइलों में दिखाए गए।”


EOW की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

इतने ठोस दस्तावेज़ सामने आने के बाद भी EOW (Economic Offences Wing) ने अभी तक तहसीलदार कृष्ण कुमार साहू, पटवारी संजीव खुदशाह और एसडीएम जगन्नाथ वर्मा के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

क्या प्रशासनिक रसूख और फाइलों की राजनीति इस घोटाले की ढाल बन गई है?


जनता का सवाल: कब होगी कार्रवाई?

स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब भारतमाला के कई मामलों में अधिकारी जेल में हैं, तो कोलर जैसे “मॉडल घोटाले” में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

“अगर कोलर केस की निष्पक्ष जांच हुई, तो आधा सच तो फाइलें खुद बोल देंगी,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।



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