पब्लिक स्वर,बीजापुर। निर्भीक पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड से जुड़े मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला दिया। सोमवार को राजस्व और नगर पालिका की टीम ने चट्टान पारा स्थित उस बाड़े को ध्वस्त कर दिया, जहां पत्रकार की निर्मम हत्या कर शव को सेप्टिक टैंक में छिपाया गया था।
गौरतलब है कि 1 जनवरी की रात से लापता मुकेश चंद्राकर का शव 3 जनवरी को सुरेश चंद्राकर के मजदूरों के लिए बनाए गए बाड़े के टैंक से बरामद हुआ था। हत्या में सुरेश और उसके दो भाई रितेश व दिनेश चंद्राकर सहित सुपरवाइज़र महेंद्र रामटेके की गिरफ्तारी हो चुकी है। सुरेश को पुलिस ने हैदराबाद से पकड़ा था।
भ्रष्टाचार का पर्दाफाश बना हत्या की वजह
मुकेश चंद्राकर ने नेलसनार-कोड़ोली-मिरतुर-गंगालूर सड़क परियोजना (लागत 73 करोड़) में भारी भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण को उजागर किया था। इसी कारण ठेकेदार और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से उनकी हत्या की गई। SIT की जांच में भी सड़क निर्माण घोटाले के बड़े सुराग मिले हैं।
नक्सल क्षेत्र में निर्भीक पत्रकार
मुकेश चंद्राकर नक्सल प्रभावित बीजापुर जैसे कठिन इलाके में भी बेखौफ पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे। उन्होंने न केवल सड़क निर्माण भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया, बल्कि अप्रैल 2021 में टकलगुड़ा माओवादी हमले के दौरान कैद किए गए कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह मन्हास की रिहाई सुनिश्चित कराने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
उनकी साहसी और जनहितकारी पत्रकारिता ने ठेकेदारों व भ्रष्ट तंत्र की नींद उड़ा दी थी। सच की इसी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उनकी हत्या लोकतंत्र और पत्रकारिता जगत के लिए गहरी क्षति है।

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