पब्लिक स्वर,रायपुर। रायपुर जिले के विकासखंड आरंग की ग्राम पंचायत गुज़रा में सरपंच बिंदू बंजारे के खिलाफ राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उपसरपंच और पंचों द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव को प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है। अब इस प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए 17 जून 2026 को दोपहर 1 बजे ग्राम पंचायत भवन गुज़रा में विशेष सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी आरंग ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए पंचायत के निर्वाचित सदस्यों की बैठक बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बैठक में यह तय होगा कि सरपंच बिंदू बंजारे अपने पद पर बनी रहेंगी या उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा।
पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
उपसरपंच और पंचों ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 21 तथा पंचायत राज नियम, 1994 के तहत विस्तृत शिकायत प्रस्तुत कर सरपंच पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में पंचायत के वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पंचों का आरोप है कि पंचायत में करीब 6 लाख रुपये की शासकीय राशि स्वीकृत और आहरित की गई, लेकिन संबंधित कार्यों और खर्च का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका कहना है कि जानकारी मांगने पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
अविश्वास प्रस्ताव में पंचायत के खर्चों को लेकर कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पेयजल व्यवस्था के नाम पर 17 अक्टूबर 2025 को 11 हजार रुपये और 18 अक्टूबर 2025 को 29,750 रुपये की राशि पानी टैंकर आपूर्ति के लिए निकाली गई, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत क्षेत्र में टैंकर से पानी की आपूर्ति नहीं हुई। इसी प्रकार 12 अगस्त 2025 को पुराने मोटर पंप और सिंटेक्स टंकी की मरम्मत अथवा नवीन निर्माण के नाम पर 32 हजार रुपये आहरित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। पंचों ने इन भुगतानों की जांच की मांग की है।
पंचायत संचालन में बाहरी हस्तक्षेप का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पंचायत की बैठकों और निर्णय प्रक्रिया में सरपंच अपने सगे भाई को शामिल करती हैं, जबकि वे पंचायत क्षेत्र के निवासी नहीं हैं और न ही कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। पंचों ने इसे पंचायत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत बताया है।
ग्रामीणों को प्रमाणन कार्यों में परेशानी
पंचों ने आरोप लगाया है कि सरपंच अधिकांश समय अपने मायके ग्राम बिमचा (जिला महासमुंद) में निवास करती हैं, जिसके कारण पंचायत क्षेत्र के लोगों को जाति, निवास, राशन कार्ड और आधार कार्ड से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन और प्रमाणन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा पंचों का कहना है कि पंचायत के अभिलेखों, पासबुक और रजिस्टर की जानकारी मांगने पर भी उन्हें दस्तावेज देखने की अनुमति नहीं दी जाती, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासन ने की तैयारी, पीठासीन अधिकारी नियुक्त
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष व्यवस्था की है।
एसडीएम एवं विहित प्राधिकारी आरंग अभिलाषा पैकरा द्वारा जारी आदेश के अनुसार तहसीलदार मंदिरहसौद विनोद साहू को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे बैठक की कार्यवाही का संचालन करेंगे और इसकी रिपोर्ट कलेक्टर रायपुर तथा एसडीएम कार्यालय को सौंपेंगे। पंचायत सचिव को सभी निर्वाचित सदस्यों को नियमानुसार पूर्व सूचना देने और उसकी पावती प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
कानून व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहेगा
बैठक के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए थाना प्रभारी मंदिरहसौद को पर्याप्त महिला एवं पुरुष पुलिस बल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वरिष्ठ आंतरिक लेखा परीक्षक को भी आवश्यक कार्रवाई और निगरानी के लिए पत्र भेजा गया है।
गुज़रा पंचायत में सरपंच के खिलाफ लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव अब स्थानीय राजनीति का प्रमुख विषय बन गया है। पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों के मतदान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिंदू बंजारे को सदन का विश्वास प्राप्त है या उन्हें पद से हटना पड़ेगा। फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें 17 जून को होने वाले विशेष सम्मेलन और उसके परिणाम पर टिकी हुई हैं।

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