पब्लिक स्वर,अभनपुर/रायपुर। रायपुर कमिश्नरेट की सीमा से सटा अभनपुर क्षेत्र धीरे-धीरे अवैध गतिविधियों का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के मुताबिक पेट्रोलिंग व्यवस्था से लेकर थाने में सालों से जमे कुछ पुलिस कर्मी ने अपनी जेब भरने अवैध शराब, रात में शराब बिक्री, जुआ-सट्टा, गांजा सहित नशे के कारोबार, अवैध रेत-खनिज परिवहन और अन्य गतिविधियों को खुला संरक्षण दे रखा है।
सालों से जमे पुलिसकर्मी, फिर भी अपराध पर लगाम क्यों नहीं?
अभनपुर में लंबे समय से पदस्थ कुछ पुलिसकर्मियों को लेकर पक्षपात, अवैध गतिविधियों की अनदेखी और कथित संरक्षण जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि यदि किसी क्षेत्र में लगातार अवैध शराब, जुआ-सट्टा और अन्य अपराधों की शिकायतें बनी हुई हैं, तो वहां लंबे समय से तैनात पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा क्यों नहीं होती?
तैनाती पर अब तक ध्यान नहीं:एक ही जगह लंबे समय पदस्थ रह कर सिंडिकेट को कर रहे मजबूत
रायपुर कमिश्नरेट प्रणाली से अपराध पर रोकथाम के दावे किए जाते हैं तो दूसरी तरफ रायपुर से ही लगे अभनपुर में पेट्रोलिंग और थाने में सालों से जमे पुलिसकर्मी सालों से एक ही जगह पर पदस्थ रह कर अपना नेटवर्क और भी मजबूत कर रहे हैं एक ASI पर तो रिश्वत लेने का गंभीर आरोप तक लग चुका है जिसके बाद SSP श्वेता सिन्हा ने TI के साथ उन्हें तलब तक किया लेकिन उसके बाद अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
रात में शराब से लेकर जुआ-सट्टे तक पेट्रोलिंग कहां है?
स्थानीय शिकायतों के मुताबिक रात के समय अवैध शराब की बिक्री, जुआ-सट्टा, गांजा एवं अन्य नशीले पदार्थों की गतिविधियां, संदिग्ध अड्डे, अवैध रेत-खनिज परिवहन और अन्य कथित गैरकानूनी गतिविधियां धड़ल्ले से संचालित की जाती है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल पुलिस पेट्रोलिंग को लेकर है।अगर रात में नियमित पेट्रोलिंग होती है, तो ये गतिविधियां पुलिस की नजर से कैसे बचती हैं?
क्या पेट्रोलिंग टीम निर्धारित रूट पर पहुंचती है?
क्या संदिग्ध वाहनों की जांच होती है?
क्या संवेदनशील इलाकों में रात के समय पुलिस की मौजूदगी रहती है?
कितनी शिकायतों पर मौके पर कार्रवाई हुई?
कितने प्रकरण दर्ज हुए और कितनी जब्ती हुई?

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